जिंदगी में कुछ बनना चाहते है तो आत्म निर्भर बनें।

 जिंदगी में कुछ बनना चाहते है तो आत्म निर्भर बनें।

         How To Be Self Dependent


आज हम एक कहानी के माध्यम से जानेंगे कि कैसे हम किसी दूसरे पर निर्भर रह कर खुद को आलसी, निकम्मा और एक लाचार इंसान बना देते है। और खुद पर विश्वास, मेहनत और प्रयास से कैसे आत्म निर्भर होकर सफल इंसान और अपनी अलग पहचान बनाते है । इस कहानी को अंत तक पढ़िए इससे जीवन जीने के लिए बहुत अच्छी सीख मिलने वाली है –

                       

                         एक बार एक गुरु और शिष्य कहीं जा रहे थे तभी रास्ते में एक कुटिया दिखी और उसके आस – पास बहुत सारा खाली खेत पड़ा हुआ था|जिसमें कोई खेती नहीं लगाई गई थी। गुरु ने शिष्य से बोला चलो आज यही रुकते है इनकी कुटिया के पास, गुरु और शिष्य कुटिया के पास गए। तभी उस कुटिया से एक आदमी उसकी पत्नी और तीन बच्चे बाहर निकले। गुरु ने पीने के लिए पानी मांगा। गुरु ने पानी पीते – पीते उस आदमी से पूछा कि तुम क्या करते हो।कैसे तुम्हारा घर चलता है। यहां तो कोई खेती कि हुई नहीं दिख रही है। सभी खेत खाली पड़े हुए है। तो उस आदमी ने उत्तर दिया और बताया कि मेरे पास एक गाय है। जो अच्छा खासा दूध देती है। उसी दूध को बेच के जो पैसे मिलते है उससे घर खर्च चल जाता है।जो दूध बचता है उसका सेवन करते है। इस लिए खेती लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है। 

            गुरु ने शिष्य से बोला शाम हो गई है, आज यही रात में रुकते है। कल सुबह होते ही यहां से निकल चलेंगे। और दोनों रात में वहीं रुक गए । जब आधी रात हुई और सब सोए हुए थे। तब गुरु ने उठकर शिष्य से बोला उठो हमें अभी चलना है यहां से, और शिष्य को बोला इस आदमी की जो गाय है उसे लेकर चलना है ।और उसे ऐसी जगह जंगल में छोड़ना है। जहा से वह लौट कर न आ सकें।

                  शिष्य को गुरु के इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था, कि जो गुरु सच्चाई की पाठ मुझे पढ़ाता आया है। आज मुझे चोरी करना कैसे सीखा रहा है। मगर शिष्य ने गुरु की बात नहीं टाला और गाय को जंगल में लेजाकर छोड़ दिया, जहां से वह लौट कर नहीं आ सकती थी।

        आगे की कहानी बहुत रोचक है। इससे हमें बहुत अच्छी सीख मिलने वाली है,जो हमारे सफलता को पाने में मदद करेगी –

                   एक दशक बीतने के बाद शिष्य जब एक बड़ा गुरु बन गया। लोगो को शिक्षा देने लगा । तो उसके मन में यह बात आई कि हमने जिस व्यक्ति की गाय को जंगल में छोड़ा था। अब चल कर उस आदमी की मदद की जाय। और शिष्य उसकी मदद करने के लिए निकल गया। शिष्य जब उस जगह पर पहुंचा तो चौंक गया। उस जगह पर बड़े – बड़े फलों के पेड़ थे। एक बड़ी सी मकान थी । शिष्य ने सोचा कि गाय के चले जाने के बाद ये लोग सबकुछ बेच कर शायद कहीं चले गए होंगे। तभी एक आदमी बगीचे में काम करता दिखा । यह वही आदमी था, शिष्य ने बोला आपने पहचाना मुझे। मै लगभग दस साल पहले यहां आया था। आदमी ने बोला क्यों नहीं पहचाना, आप लोग तो बिना बताएं ही चले गए। और उसी दिन मेरी जो गाय थी वह भी पता नहीं कहां चली गई। जो वापस लौट कर कभी नहीं आई।

आत्म निर्भर बनने की प्रेरणा-

                  आदमी ने बताया की जब गाय चली गई तो उसे घर चलाने के लिए बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा।कुछ समय तो समझ नहीं आ रहा था कि क्या करू। फिर मैंने जंगल से लकड़ियां काटकर बेचने का काम शुरू किया। जो पैसे मैंने उससे कमाएं, उससे मैंने फलों का बगीचा लगा दिया। धीरे धीरे मेरे पास बहुत बड़ा फलों का बगीचा हो गया है। आज मै इस इलाके का सबसे बड़ा फलों का व्यापारी हूं। और यह सब न होता अगर मेरी गाय नहीं गई होती तो। गाय के चले जाने के बाद से मैंने कठिन परिश्रम करना शुरू किया। और आज मै इतना बड़ा फलों का व्यापारी हूं। 

              शिष्य ने आदमी से बोला कि ये काम तो आप पहले भी कर सकते थे। आदमी ने बोला की मैं गाय की वजह से लाचार था। मेरा घर खर्च बिना काम किए भी चल रहा था। इस लिए मैं कभी काम करने का प्रयास ही नहीं किया। गाय के चले जाने से मुझे पता चला कि मै भी कुछ कर सकता हूं। और मै प्रयास करना शुरू किया, अपने प्रयासों और मेहनत एवं लगन से आज एक बड़ा फलों का व्यापारी हूं।

निष्कर्स

                     तो सोचिए आपकी जिंदगी में भी कोई ऐसी गाय तो नहीं जो आपको कुछ कर गुजरने,एक सफल इंसान बनने से रोक रही हो। अगर है तो आज ही उसकी रस्सी को काट कर जंगल में छोड़ दीजिए, और कुछ ऐसा करिए जिससे दुनिया आपको पहचाने। एक सफल इंसान बनिए, आत्म निर्भर बनिए। दूसरो पर निर्भर रहना आज ही छोड़ दीजिए, घर में कितने भी लोग कमाते हो मगर आपको अपनी कमाई और मेहनत पर भरोसा रखिए। इसे अपना आत्म सम्मान समझिए। और कुछ कर गुजरने की कसम लिजिए। कि जबतक कुछ बन नहीं जाता, सफलता मेरी कदम नहीं चूमती, तबतक मै एक मिनट भी आराम से नहीं बैठूंगा।

 

   आपके लिए एक वाक्य

सुबह की नींद इंसान के इरादों को कमजोर बनाती है, मंजिल को हासिल करने वाले कभी देर तक नहीं सोते।

जय हिन्द, जय भारत!

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