प्रेरणादायक हिंदी कहानी Best Motivational Story In Hindi

 प्रेरणादायक हिंदी कहानी

Best Motivational Story In Hindi


               कहानियों के माध्यम से हमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। कहानियां पढ़ कर उसे अपने जीवन में अमल करना चाहिए। जिससे हमारा जीवन सफलता के शिखर तक पहुंच सकता है। कहानियां बहुत लोगो के जीवन को बदलने का काम करती है। आज इसी तरह की प्रेरणा देने वाली कहानी (Best Motivational Story In Hindi) बताने जा रहा हूं। कहानी को अन्त तक पढ़िए। कहानी को पढ़ कर आपको अच्छी सीख और सकारात्मक प्रेरणा दोनों मिलने वाली है।



प्रेरणादायक हिंदी कहानी Best Motivational Story In Hindi


💠 एक रस्सी तीन गांठे 💠

   भगवान बुद्ध अक्सर अपने शिष्यों को ज्ञान दिया करते थे। एक दिन सुबह बहुत से भिक्षुक उनसे शिक्षा लेने के लिए बैठे थे। बुद्ध समय से सभा में पहुंचे पर आज शिष्य उन्हें देख कर आश्चर्य चकित हो गए। क्योंकि आज पहली बार अपने हाथ में कोई सामान लेकर आए थे। पास आने पर शिष्यों ने देखा कि बुद्ध के हाथ में एक रस्सी है। भगवान बुद्ध अपने जगह पर बैठ गए। और बिना किसी से कुछ बोले रस्सी में गांठें लगाने लगें। वहां उपस्थित सभी शिष्य यह देख कर सोच रहे थे कि अब भगवान बुद्ध आगे क्या करने वाले हैं।



            भगवान बुद्ध ने वहां उपस्थित सभी लोगो से एक सवाल किया कि मैंने इस रस्सी में तीन गांठें लगा दिया है। अब मैं आप लोगो से यह जानना चाहता हूं कि क्या यह वही रस्सी है जो गांठें लगाने से पूर्व थी। एक शिष्य ने जवाब दिया कि गुरूजी, इसका उत्तर देना तो थोड़ा कठिन हो सकता है। ये हमारे देखने के नजरिए पर निर्भर करता है। सही तौर पर देखे तो ये रस्सी वहीं है, इसमें कोई बदलाव नहीं आया है। दूसरी तरह से देखे तो इसमें अब तीन गांठें लगी हुई है जो पहले नहीं थीं। अतः हम इसे बदला हुआ कह सकते है। पर यह बात भी ध्यान देना चाहिए, कि बाहर से देखने में भले ही यह बदली हुई दिख रही हो पर अन्दर से तो वहीं है। जो पूर्व में थी। भगवान बुद्ध ने कहा ये बोलकु सत्य है। अब मैं ये गांठें खोल देता हूं।



               भगवान बुद्ध रस्सी को खोलने के लिए उसके दोनों किनारों को दोनों तरफ खींचने लगे। बुद्ध ने शिष्यों से पूछा, क्या इस प्रकार इसे खींचने से इन गंठो को खोला जा सकता है। एक शिष्य ने उत्तर दिया, कि इस तरह खींचने से गांठें और भी मजबूत हो जाएंगी। इसे खोलना और भी कठिन हो जाएगा। तो भगवान बुद्ध ने कहा एक और प्रश्न, बताओं कि इन गाठों को खोलने के लिए क्या करना होगा। एक शिष्य बोला, इसके लिए हमें गाठों को गौर से देखना होगा। कि यह कैसे लगाया गया था। और फिर हम इन्हें खोलने की कोशिश कर सकते हैं। 

            भगवान बुद्ध ने कहा कि मै यही तो जानना चाहता था। मूल प्रश्न यही है। कि जिस समस्या में तुम उलझे हो, वास्तव में उसका कारण क्या है। बिना कारण जाने उसको हल करना कठिन है। मै देखता हूं कि लोग बिना कारण जाने उसे हल करने लग जाते है। कोई यह नहीं पूछता की मुझमें अहंकार का बीज कहां से उत्पन्न हुआ। लोग ये पूछते है कि अपने अहंकार का अंत कैसे करूं। कोई ये नहीं पूछता कि मुझमें क्रोध कहां से उत्पन्न हुआ। लोग पूछते है कि मै अपने क्रोध को अपने बस में और इसका अंत कैसे कर सकता हूं। 

कहानी का निष्कर्ष-

    प्रिय शिष्यों जिस प्रकार रस्सी में गांठ लग जाने पर भी उसका मूल स्वरूप नहीं बदलता। ठीक उसी प्रकार मनुष्य के अन्दर कुछ अवगुण आ जाने से उसके अन्दर से अच्छाई के बीज समाप्त नहीं होते है। जैसे हम रस्सी की गाठ खोल सकते है, वैसे ही हम मनुष्य की समस्या को हल भी कर सकते हैं। इस बात को समझो कि जिन्दगी है, तो समस्याएं, और मस्किलें भी होंगी। समस्या है तो समाधान भी अवश्य होगा। आवश्यकता है कि हम किसी भी समस्या के कारण को अच्छी तरह से समझे। निवारण स्वतः ही हो जाएगा। 

                  इस कहानी से हमने जाना है कि किसी भी समस्या का निवारण, हल तब तक नहीं हो सकता है। जबतक उस समस्या के कारण को हम अच्छे से नहीं जान लेते। जैसे बहुत बार हम अपने मां, बाप, भाई, पत्नी, पुत्र आदि से रिश्ता खराब हो जाने के बाद उसे कैसे ठीक करे, इसी में उलझे रहते है। पर यह नहीं जानने की कोशिश करते है कि रिश्ता खराब होने का मूल कारण क्या है। उस कारण को ठीक करे तो रिश्ता अपने आप ठीक हो जाएगा। 

आपके लिए दो पंक्तियां-

जो समय का मोल समझते हैं।
 समय उन्हें अनमोल बना देता है।।
  वो साथ थे तो एक शब्द न निकला लबो से, 
     दूर क्या हुए…कलम ने कहर मचा दिया।

जय हिन्द, वन्दे मातरम्!
                   

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