हिन्दी प्रेरणादायक कहानी Real&Best Motivational Story In Hindi

हिन्दी प्रेरणादायक कहानी

Real&Best Motivational Story In Hindi

             दोस्तो, जीवन में कहानियों का (Motivational Story In Hindi) एक अलग महत्व है । कहानियां मनुष्य को रास्ते दिखने का काम करती है। हम जीवन में प्रेरणा देने वाली कहानियों (Inspirational Stories In Hindi) से बहुत कुछ सीखते है। कहानियां जीवन जीने की सकारात्मक प्रेरणा देती है। आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। जिसमे हम जानेंगे कि कैसे किसी एक काम को दो लोग, दो नज़र से देखते है। उनके उसी काम को देखने के अलग अलग नजरिए के बारे में जानेंगे। अंत तक पढ़िए, इस कहानी से बहुत कुछ सीखने के लिए मिलने वाला है –

Best Motivational Story In Hindi

नजर को बदलो, नजारे बदल जायेंगे

You Will Become What You Think

दोस्तों, आपको एक और रोचक प्रेरित करने वाली कहानी सुनने जा रहा हूं। ये कहानी है सन् 1990 की । भारतीय फुटवियर (Footwear) कंपनी जो भारत में तो बहुत अच्छा काम कर रही थी। पर उनकी महत्वाकांक्षा थी दूसरे देशों में व्यापार फैलाने की। यह कहानी है उस कंपनी में काम कर रहे sellsman सेल्समैन के दो टीम मेम्बर की। एक का नाम सूरज और दूसरे का नाम राकेश था। 

        सूरज और राकेश दोनों एक साथ एक ही कॉलेज में पढ़े लिखे थे। दोनों एक ही शहर के थे। इन दोनों ने नौकरी भी एक साथ ही ज्वाइन की थी। लेकिन दोनों में फर्क था तो वह सिर्फ दोनों की सोंच में था। सूरज हमेशा सकारात्मक सोचा करता था। कितना भी काम का दबाव हो, वह उम्मीद के साथ काम किया करता था। वहीं राकेश नकारात्मक विचारों वाला था। किसी भी काम में कमियां निकालता रहता था। वह जल्दी अमीर बनने की सोचता था। 

       सूरज और राकेश दोनों अपने काम अच्छी तरह से कर रहे थे। तभी एक दिन उनके कम्पनी के मालिक (Boss) ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया। और बोला कि, तुम दोनों को यह जानकर खुशी होगी कि हमारी कम्पनी अन्तर्राष्ट्रीय हो गई है। हमारी कम्पनी का अन्तर्राष्ट्रीय विस्तार हो रहा है। और मैंने तुम दोनों को चुना है कि तुम दोनों वहां जाकर बाज़ार कि स्थिति पर एक रिपोर्ट तैयार करो। बॉस ने कहा, तो क्या तुम दोनों इस काम के अवसर मिलने से खुश हों।

        सूरज के चेहरे पर एक अलग मुस्कान थी। उसे खुशी थी कि इस काम के लिए उसे चुना गया। जबकि उस कंपनी में और भी बहुत लोग थे जो इस काम को कर सकते थे। वह सोचता कि कुछ तो है मुझमें जो बॉस ने इस काम के लिए मुझे चुना है। कम्पनी अफ्रीका में ऑफिस खोल रही है यार! मुझे तो वहां जाने का बचपन से सपना था। यह मेरे लिए आगे बढ़ने का एक अद्भुत अवसर है। वहीं एक तरफ राकेश के मन में अजीब अजीब बाते चल रही थी। ओह, मुझे पता था ये बॉस पहले से ही मुझसे खुंदक खाता है। सब ऊटपटांग कामों के लिए मुझे ही चुनता है। क्या जगह चुनी है यार, बॉस ने कंपनी को अन्तर्राष्ट्रीय बनाने के लिए, अफ्रीका। धूल, मिट्टी, मच्छर, गरीबी वाली जगह। और वहां जाने के लिए मुझे ही चुना।

         उसके कुछ दिन बाद दोनों अपनी पैकिंग करके नाईजीरिया के लिए निकल गए। एक उत्साह के साथ निकला और दूसरा वहीं दिल में रंजिसे, सिकायते लेकर निकला। दोनों को लगभग बारह दिन के बाद वहां की स्थिति पर एक रिपोर्ट बना कर कंपनी मुख्यालय टेलीग्राम करना था। कि नाईजीरिया फुटवियर के लिए कैसा बाज़ार है। वहां पर फुटवियर लॉन्च किया जाय की नहीं किया जाएं। दोनों की  टेलीग्राम की हुई रिपोर्ट कुछ इस प्रकार थी। 

            राकेश ने रिपोर्ट में लिखा था कि ये पूरी ट्रिप,  मेरेे पूरे समय और कंपनी के समय कि बर्बादी थी। कम्पनी की पूरी तरह हार होगी, अगर हमने अपना फुटवियर यहां लॉन्च किया तो। यहां पर कोई भी जूते नहीं पहनता है। वहीं दूसरी तरफ हमारे मित्र सूरज ने अपने रिपोर्ट में लिखा, कि ये हमारे कंपनी के लिए अद्भुत अवसर है। अगर हमने अपने फुटवियर यहां लॉन्च किए तो कंपनी को बहुत बड़ी सफ़लता मिलेगी। क्योंकि यहां अभी कोई जूता चप्पल पहनता ही नही है। यहां हम पूरे देश को अपने फुटवियर बेच सकते हैं। क्योंकि यहां कोई और फुटवियर कम्पनी नहीं हैं। यहां पर किसी फुटवियर कम्पनी से कोई मुकाबला नहीं है।

    उन दोनों को भारत वापस आने पर सूरज को इस नए प्रोजेक्ट का हेड Head बनाया गया। बड़ी प्रमोशन मिली। ये और भी खुश हुआ कि मुझे इस काम से बहुत कुछ सीखने के लिए मिलेगा। वहीं दूसरी तरफ राकेश उसी पुराने ऑफिस के काम में उन्हीं सिकायतों के साथ लगा रह गया। और दूसरे का जीवन पूरी तरह बदल गया।

       दोस्तो, दोनों को सब कुछ एक जैसी सुविधाएं मिली, दोनों एक साथ एक ही ऑफिस में काम किए। पर दोनों कि जिंदगी में इतना बदलाव कैसे। आपको बता दूं कि दोनों में एक बात का अंतर है जो एक को सफल इंसान बनाती है और दूसरे को वहीं की वहीं जिंदगी जीने पर मजबूर करती है। वह है दोनों की सोच का अंतर, विचारों का अंतर। सूरज किसी भी काम को सकारात्मक नजर से देखता है तो वहीं राकेश किसी भी काम को नकारात्मक नजर से देखता है। उसमे कमियां निकालता रहता है।

        मैंने कहीं पढ़ा था, कि सीढ़ियां तो वहीं होती है, किसी के लिए ऊपर जाती है तो किसी के लिए नीचे। फर्क केवल सोच और विचारों का होता है। कहीं आप भी तो राकेश कि तरह अपने अवसर को नज़र अंदाज़ तो नहीं कर रहे हैं। अपने सोच को नकारात्मक तो नहीं बना रहे हैं। कितना भी मुश्किल जगह हो। आप अपने लिए वहां अवसर तलाश सकते है। ये तब होगा जब आप अपनी सोच, अपने विचार को किसी भी स्थिति के लिए सकारात्मक रखेंगे। ऐसे व्यक्ति की सफलता कदम चूमती है। ऐसे ही लोग कल जाकर इतिहास बनते हैं। जैसे आज हमने सूरज का उदाहरण दिया। 

    हमारी सोच, हमारे विचार यह तय करते हैं। कि  किसी भी काम में हमें संभावनाएं नज़र आ रही हैं या रुकावटें। किसी महान व्यक्ति ने कहा था कि अपने सोच में सकारात्मक बदलाव कीजिए। जिंदगी धीरे धीरे अपने आप अच्छी हो जाएगी।  

आपके लिए एक वाक्य –

बदल जाओ समय के साथ या समय को बदलना सिखों। 
मजबूरियों को मत कोंसो, हर हाल में चलना सिखों।।
 

जय हिन्द, जय भारत!

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