Motivational Story In Hindi for Depression

 Motivational Story In Hindi for Depression

मानसिक तनाव संबंधी प्रेरक कहानी
              दोस्तों, आज के दौर में इंसान शारीरिक तौर पर बीमार के तुलना में मानसिक तौर पर ज्यादा बीमार हैं। मानव मस्तिष्क शरीर का सबसे महत्वपूर्ण भाग है। इसी से पूरे शरीर पर नियंत्रण रहता है। आज के समय में मानसिक तनाव एक बहुत बड़ी समस्या है। चाहे वह स्कूल का छात्र हो, किसी कंपनी में काम करने वाला कर्मचारी या घर का जिम्मेदार व्यक्ति सब इस मानसिक तनाव की बीमारी से जूझ रहे हैं। आज हम इसका समाधान इस कहानी (Motivational Story In Hindi for Depression) के माध्यम से करेंगे । इस कहानी को अन्त तक पढ़िए, आशा करता हूं कि इस कहानी को पढ़ने के बाद आपके जीवन जीने के तरीके में बदलाव जरूर आएगा।
Motivational Story In Hindi for Depression

डिप्रेशन: अक्षय कुमार के जीवन से प्रेरित सबक-

          दोस्तों, आज की यह कहानी फ़िल्म अभिनेता अक्षय कुमार के जीवन से प्रेरित है। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार कहते है कि जब उन्हें पहला राष्ट्रीय पुरस्कार देश के माननीय राष्ट्रपतिजी के हाथों से मिलना था तो उन्हें अपार ख़ुशी हो रही थी। उस समय उन्हें अपने मा से बात करते समय अपने बचपन की एक बात याद आ गई। एक दिन अक्षय कुमार के स्कूल के परीक्षा के परणाम आने थे । अक्षय के मार्क बिल्कुल खराब थे,और वह उस कक्षा में अनुत्तीर्ण हो गए। अक्षय ने सोच लिया कि अब तो घर जाकर खुब पिटाई होने वाली है। 
         अक्षय कुमार अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर घर आए। अक्षय के पिता ने उन्हें अपने सामने बैठा कर पूछा कि बेटा बताओ तुम करना क्या चाहते हो । अक्षय ने बोला, पापा मै खेल कूद करना चाहता हूं। मेरा मन खेलकूद में लगता है । मै खिलाड़ी बनना चाहता हूं। उनके पिता ने कहा ठीक है तुम खेल कूद पर ध्यान दो, हम तुम्हारा साथ देंगे। साथ में कुछ पढ़ाई भी किया करो। अक्षय खेलते खेलते मार्शल आर्ट्स करने लगे, मॉडलिंग में आ गए, एक्टिंग शुरू कर दी। उनके माता पिता ने हर चीज में उनका साथ दिया। 
   दोस्तों, अगर अक्षय के पिता ने ये नहीं उन्हें समझाया होता की उनकी Strength रुचि किसमे है। उन्हें जिस काम में मन लगता है, वहीं काम करें। तो आज वह इतने बड़े फ़िल्म अभिनेता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता नहीं बनते। 

डिप्रेशन: युवाओं के लिए सबक-

  आज मै अक्षय कुमार के जीवन के बारे में इसलिए बता रहा हूं। कि कुछ दिन पहले अखबार में मै पढ़ा था कि एक आईआईटी के छात्र ने फांसी लगाकर आत्म हत्या कर लिया था। मुंबई में एक मैनेजमेंट का छात्र छत से छलांग लगाकर आत्म हत्या कर लिया। इस लिए कि उनके मार्क्स कम आए थे। मैंने कही ये भी पढ़ा था कि विश्व में एक वर्ष में करीब आठ लाख लोग आत्म हत्या से मरते हैं। और उसमे से लगभग डेढ़ लाख लोग केवल हिंदुस्तान से होते हैं। 
      युवा लोगो की आत्म हत्या का कारण केवल पढ़ाई होती है। मैं पुछता हूं क्यों? आपकी जान की कीमत एक परीक्षा के मार्कशीट से सस्ती हो गई है। ऐसी क्या पढ़ाई, इससे तो अच्छा जान देदो जाके देश के सरहद पर, देश के लिए तो काम आ जाओगे। चाहे कोई भी समस्या हो कोई बड़ा से बड़ा मानसिक तनाव हो, एक बार सोचो कि अगर पता चले तुम्हारे मा बाप को कि तुमने अपनी जान दे दी है। तो उनकी क्या हालत होगी। मा बाप के जीने का मकसद छीन ली तुमने अपनी जान दे कर। माना आपका मानसिक तनाव ज्यादा है। पर अपने जीवन को इतना सस्ता भी न बनाओ। आत्म हत्या करके अपने मा बाप को जीवन का सबसे बड़ा दुःख देकर मत जाओ। 

डिप्रेशन: माता पिता के लिए सबक-

    आपका बच्चा आपसे अपने मानसिक तनाव (Depression) के बारे में कैसे बतायेगा, जब आप भी अपनी आंख लगाए फोन में बैठे रहते हो तो। और आपका बच्चा भी Facebook में  फ्रैंड ढूंढ रहा है।   बच्चे को शरीर में कहीं चोट आए तो हम तुरंत डॉक्टर  बुला लेेते हैं। पर मानसिक रूप  से परेशान बच्चे को यह बोलकर चुप करा देते हैं कि सकारात्मक रहो बेटा, तुम सब कर सकते हो। मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी डॉक्टर या काउंसलर की सहायता लेना उतना ही जरूरी है जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए है। 
       किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव (Depression) हो, उसे अपने मन में दबा कर नहीं रखना चाहिए। उसे किसी दोस्त या मा बाप को बताओ। अपने दिल और दिमाग में कुछ भी दबा के मत रखो। हाल ही में समाचार पढ़ा कि फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने डिप्रेेेशन के कारण आत्म  हत्या कर लिए। उन्होंने अपने मानसिक तनाव के बारे में किसी को नहीं बताया। उनके पास समाधान हर चीज का था। हर समस्या कि थी। फिर भी खुद से हार गए। क्योंकि उन्होंने अपने मा बाप के बारे में नहीं सोचा कि क्या होगा अगर मै आत्म हत्या कर लेता हूं तो। दोस्तों अपने जीवन को इतने हल्के में मत लो। कहते हैं कि ‘अगर दिल खोल लेते यारों के साथ तो आज छोड़ना न पड़ता  हज़़ा़रों का साथ’। 

निष्कर्ष-

              चाहे कितनी भी बड़ी समस्या हो,  कितना भी तनाव  हो, डिप्रेशन हो आत्म हत्या इसका समाधान नहीं है। क्या हुआ हमें एक कामयाबी नहीं मिली। दूसरा प्रयास करेंगे। दूसरा नहीं तो तीसरा । कहीं न कहीं सफलता जरूर मिलेगी। समस्या एक होती है पर समाधान अनेक होते हैं। हमें समस्या के कारण को जानकर उसका समाधान करने का प्रयास करना चाहिए। दोस्तों, आज खुद से वादा करो कि समस्या कितनी भी बड़ी हो आत्म हत्या नहीं करेंगे।  अपनी समस्या को, मानसिक तनाव को अपने दोस्तो, मा बाप, से बताएंगे। और उसे सुलझाने कि हर संभव प्रयास करेंगे। 
जय हिन्द, वन्दे मातरम्

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