Poor To Rich Motivational Story In Hindi

 Poor To Rich Motivational Story In Hindi


           दोस्तों, (Poor To Rich Motivational Story) शुरू करने से पहले  मुख्य बातो पर एक नजर डालेंगे । जैसा कि हम जानते हैं, ये कहानी गरीब व अमीर की है। दोस्तों, दुनिया में  दो तरह के लोग होते हैं। पहला गरीब और दूसरा अमीर । इन दोनों  में समानता भी बहुत कुछ देेखने के लिए मिलता है। गरीब हो या अमीर, दोनो के जन्म लेने में नौ महीने का ही समय लगता है। दोनों के दो दो हाथ पैर होते हैं। आंख, नाक, कान, मुंह सबकुछ एक समान ही होता है।फिर दोनों में एक अमीर और दूसरा गरीब कैसे हो जाता है। 


     गरीबी और अमीरी की प्रेरणादायक कहानी (Poor To Rich Motivational Story In Hindi) के माध्यम से जानेंगे कि कैसे गरीब, गरीब बन जाता है और अमीर अमीर बन जाता है। आज हम गरीब इंसान की कहानी जानेंगे जो हमेशा भगवान से अपने गरीब होने की सिकायत करता रहता था। कहानी को अन्त तक पढ़िए। इस कहानी को पढ़ने के बाद आप अमीर कैसे बना जाता है जरूर सिख जायेंगे।

  

Poor To Rich Motivational Story In Hindi

 गरीबी और अमीरी 

 Rich  Vs  Poor Thinking 

दोस्तो, एक आदमी था जो अपने पड़ोसियों को अमीर बना देख कर हमेशा भगवान से शिकायत करता रहता था कि मुझे गरीब क्यों बनाया। वह कहता था कि मेरे झोपड़ी से दूर रहने वाला व्यक्ति अमीर है और मै गरीब ऐसा क्यों है? वह कहता था कि गरीब आदमी को तो बहुत परिश्रम करना पड़ता है। और अमीर आदमी को सबकुछ आसानी से मिल जाता है। 


      ऐसे में भगवान ने क्या किया कि जो उसके पड़ोस में अमीर आदमी था उसे भी उसके जैसा गरीब बना दिया। और दोनों को झोपड़ी दे दिया। दोनों को मछली पकड़ने वाली एक एक बंशी दे दिया था। अब दोनों गरीब थे और दोनों के पास मछली पकड़ने वाली बंशी थी तो दोनों ने मछली पकड़ने का काम शुरू कर दिया। पहले दिन दोनों ने बीस बीस मछली पकड़ी। मछली पकड़ने के बाद जो पहले से गरीब आदमी था उसने बिसों मछलियों को तीन हजार में बेचा और उस पैसे का अच्छा अच्छा खाना खाया, पार्टी मनाया, नये नये कपड़े खरीदें और सारे पैसे ख़तम कर दिया। लेकिन जो अमीर आदमी था बाद में गरीब बना था उसने उन्नीस मछलियां बेच कर पच्चीस सौ रुपए कमाए। और एक मछली को अपने परिवार के साथ मिलकर खा लिया। उसका परिवार अभाव में समय व्यतीत किया। लेकिन उसने पंद्रह सौ रुपए में एक और मछली पकड़ने वाली बंशी खरीद लिया। और पांच सौ रुपए में अपने साथ मछली पकड़ने के लिए एक आदमी भी रख लिया। पांच सौ रुपए बचा कर भी रख लिया कि कभी भविष्य में अपातकालीन  परिस्थिति में काम आ सकें। 


व्यक्ति विचारों से गरीब और अमीर होता है –

       
         अगले दिन फिर जो पहले से गरीब आदमी था उसने मछली बेच कर तीन हजार रूपए कमाए। और अच्छे अच्छे खाना खाकर, पार्टी मना कर, नए नए कपड़े खरीद कर पूरे पैसे खर्च कर दिया। परन्तु जो बाद में गरीब बना था उसने अगले दिन चालिस मछलियां पकड़े और दो मछलियों को अपने परिवार के साथ मिलकर खा लिया। और मछलियां बेचकर पैतिस सौ रुपए कमाए। इसमें से पांच सौ जो आदमी रखा था उसे दे दिया। इस बार उसने मछली पकड़ने वाली दो और बंशी खरीद लिया। साथ में मछली पकड़ने के लिए पांच पांच सौ रुपए में दो आदमी और रख लिया। कुछ अपने कमाई के पैसे भविष्य के लिए बचा कर भी रख लिया।



                फिर से अगले दिन जो पहले से गरीब आदमी था उसने मछलियां पकड़ कर बेचा। उससे जो पैसा मिला उसे खाने पीने और पार्टी मनाने में खर्च कर दिया। लेकिन जो बाद में अमीर से गरीब बना था उसने जो मछलियां पकड़ के बेचा। उससे जो पैसा मिला, उसका वह और चार मछली पकड़ने वाली बंशी खरीद लिया। अपने साथ मछली पकड़ने के लिए पांच पांच सौ रुपए में चार और आदमी रख लिया। ऐसे करके उसने बहुत सारे लोगों को अपने पास काम पर रख लिया । और वह बस काम पर नजर रखने का काम करने लगा। वह उस क्षेत्र का सबसे बड़ा मछलियों का व्यापारी बन गया। वह फिर से अमीर बन गया। अपने परिवार को अच्छे से सारी सुविधाएं देने लगा । सब खुशी खुशी जीवन जीने लगें। लेकिन वहीं जो पहले से गरीब आदमी था, वह उन्हीं शिकायतों, दिल में रंजीसे लिए जीवन व्यतीत करता रहा, कि भगवान आपने मुझे दूसरों से गरीब क्यों बनाया। अमीर आदमी को कम परिश्रम करने से ही सब कुछ मिल जाता है। गरीब को बहुत कठिन परिश्रम करने पर भी ज्यादा कुछ नहीं मिलता। 


निष्कर्ष –

               दोस्तों, अब आपको समझ आ गया होगा कि भगवान सभी लोगों को एक जैसे देखते हैं। सभी को एक जैसे जीवन बदलने के अवसर प्रदान करते हैं। उस अवसर को सकारात्मक लेने वाला अमीर बन जाता है। इससे पता चलता है कि गरीब और अमीर आदमी के सोच और दिमागी स्थिति का अंतर होता है। गरीब आदमी अपने परिश्रम में शरीर के गले के नीचे का भाग इस्तेमाल करता है। वहीं अमीर आदमी गले के ऊपर का भाग। यानि दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करता है। 


          इस कहानी को पढ़ने के बाद आप अपने किस्मत को कोसना (दोष देना) छोड़ दीजिए। भगवान केवल मौका, अवसर प्रदान करता है। किस्मत बदलना हमारे हाथ में है। कुछ पाने के लिए कुछ खोने की हिम्मत रखो। जिसने भी त्याग किया है, वह जीवन में सफल अवश्य हुआ है। 


💠हमारी सोच ही पूंजी है,
          उद्यम ही हमारा रास्ता है,
               कड़ी मेहनत ही हमारा समाधान है।📚


जय हिन्द, वन्दे मातरम्
        

      
         

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *